श्रीकृष्ण के दादा और नाना कौन थे? जानिए यदुवंश का इतिहास – भाग 3

Share

कृष्ण का वंश  

एक महान योद्धा यदु ने बृज (इसे ब्रज अथवा वृज भी कहते हैं) क्षेत्र में एक राज्य स्थापित किया। यदु के वंशज यदुवंशी या यादव कहे जाते थे। धीरे-धीरे यदुवंश की कई शाखाएँ हो गईं। ये सभी शाखाएँ अलग-अलग क्षेत्रों में स्वतंत्र शासन करती थीं। उनमें कोई संगठन और एकता नहीं थी। कभी-कभी वे आपस में लड़ भी पड़ते थे। ऐसे ही समय में शूरसेन का जन्म हुआ था।

कृष्ण के दादा कौन थे?

कृष्ण के दादा का नाम शूरसेन था। उनका जन्म भी यादव वंश की एक शाखा में ही हुआ था। शूरसेन बहुत ही पराक्रमी और दूरदर्शी थे। उन्होंने बिखरे हुए यदुवंशियों को संगठित किया और एक बड़ा राज्य फिर से स्थापित किया। लेकिन इसके लिए उन्होंने अन्य यदुवंशियों की जानें नहीं लीं, बल्कि उन्हें एकजुट किया। उन्होंने समस्त यादव साम्राज्य को कई मंडलों में बाँट दिया। मण्डल प्रशासनिक इकाइयाँ थीं। इनके अंतर्गत यादव वंश की शाखाएँ पहले की तरह ही अपने-अपने क्षेत्र में शासन करती रहीं। इन राजवंशों में जो सबसे अधिक शक्तिशाली होता था, उसे सभी अपना अधिपति मान लेते थे। अधिपति को समय-समय पर वे कुछ कर (टैक्स) देते रहते थे। इसके अलावा अन्य मामलों में वे लगभग स्वतंत्र थे।

शूरसेन ने अपने राज्य को मथुरा और शूरसेन—नामक दो मंडलों में विभक्त किया। उन्होंने ही सबसे पहले मथुरा को अपनी राजधानी बनाया, जो उनके बाद भी यादव साम्राज्य की राजधानी बनी रही।

शूरसेन के बाद यदुवंश

शूरसेन के बाद यादवों के वृष्णि या भोज वंश ने अधिक शक्ति प्राप्त कर ली। यह भोज वंश मध्यकालीन भोज वंश से अलग था। अब सभी यादव उन्हें ही अपना अधिपति मानने लगे। उनकी राजधानी मथुरा थी। शूरसेन और मथुरा मंडल अभी भी भोज या वृष्णि यादव साम्राज्य के अंतर्गत स्वतंत्र प्रशासनिक इकाइयाँ थीं। उनके शासक भोज वंशी शासक को केवल सैद्धांतिक रूप से अपना अधिपति मानते थे और कर देते थे। शूरसेन के पुत्र वसुदेव हुए। कृष्ण-बलराम इन्हीं के पुत्र थे। इस तरह शूरसेन कृष्ण-बलराम के दादा थे।

यद्यपि अब वृष्णि या भोज यादवों का वंश सबसे शक्तिशाली वंश हो गया था और सभी यादव उसे ही अपना सैद्धांतिक अधिपति मानते थे और कर देते थे, तथापि सदाचार, धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा के कारण शूरसेन वंश का यादवों में विशेष सम्मान था।

कृष्ण के नाना कौन थे?

सभी यादवों के अधिपति वृष्णि या भोज वंश के यदुवंशी राजा थे। इनकी राजधानी मथुरा थी। यादवों में उस समय सबसे अधिक शक्तिशाली यही वंश था। इनके एक राजा आहुक थे। आहुक के दो पुत्र हुए— उग्रसेन और देवक। उग्रसेन का पुत्र कंस था और देवक की पुत्री देवकी थीं। आहुक के बाद उनके बड़े पुत्र उग्रसेन राजा बने। वह एक लोकप्रिय राजा थे। प्रजा और परिवार का वे सदा कल्याण चाहते थे, लेकिन उन्हें बलपूर्वक गद्दी से हटाकर उनका पुत्र कंस राजा बन बैठा।

वृष्णि या भोज वंश के आहुक के छोटे पुत्र देवक की पुत्री देवकी का विवाह शूरसेन वंश के वसुदेव के साथ हुआ था। देवकी और वसुदेव ही कृष्ण-बलराम के माता-पिता बने।

इस तरह वृष्णि या भोज वंश के यादव राजा आहुक कृष्ण के परनाना और कंस के दादा थे। कंस के चाचा देवक कृष्ण के नाना थे।

Leave a Comment

Scroll to Top