वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण वध के पश्चात् जब श्रीराम का अयोध्या में राज्याभिषेक हुआ, तो उन्होंने केवल अयोध्या का ही कुशल शासन नहीं संभाला, बल्कि अपने भाइयों और उनके पुत्रों के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप के कई दूर-दराज़ क्षेत्रों में नए राज्यों और अत्यंत वैभवशाली नगरों की स्थापना भी करवाई।
श्रीराम की यह नीति केवल साम्राज्य विस्तार के लिए नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य चारों ओर धर्म की स्थापना करना, अराजकता को समाप्त करना और प्रजा को एक सुरक्षित व समृद्ध वातावरण देना था। आइए जानते हैं कि श्रीराम के आदेश पर किन-किन राज्यों और नगरों का निर्माण हुआ था।
1. मथुरा (शूरसेन राज्य) — शत्रुघ्न जी द्वारा स्थापना
यमुना नदी के तट पर ‘मधुवन’ नाम का एक विशाल और समृद्ध प्रदेश था, जहाँ दानव राज लवणासुर का आतंक छाया हुआ था। वह मुनियों और प्रजा पर घोर अत्याचार करता था। श्रीराम के छोटे भाई शत्रुघ्न जी ने श्रीराम की अनुमति से लवणासुर का वध किया और उस क्षेत्र में धर्मराज की स्थापना की।
- मथुरा नगर: शत्रुघ्न जी ने लवणासुर के वध के बाद उसी स्थान पर एक अत्यंत सुंदर नगर बसाया, जिसे मथुरा नाम दिया गया।
- पुत्रों में विभाजन: आगे चलकर शत्रुघ्न जी ने अपने दो पुत्रों के लिए इस राज्य को दो भागों में बाँटा:
- सुबाहु: मथुरा का राजा बनाया गया।
- शत्रुघाती: वैदिश (विदिशा) नगर बसाकर उन्हें वहाँ का राजा बनाया गया।
2. तक्षशिला और पुष्कलावत — भरत जी के पुत्रों द्वारा स्थापना
श्रीराम के मामा और केकेय देश के राजा युधाजित के सुझाव पर सिंधु नदी के दोनों तटों पर फैले गंधर्व देश को जीता गया। गंधर्वों का पराभव करने के बाद भरत जी ने अपने दोनों पराक्रमी पुत्रों के लिए दो नए विशाल नगर बसाए:
- तक्षशिला (Takshashila): सिंधु नदी के पूर्वी तट पर भरत जी के बड़े पुत्र तक्ष के नाम पर ‘तक्षशिला’ नगर बसाया गया, जो आगे चलकर ज्ञान और शिक्षा का विश्वप्रसिद्ध केंद्र बना।
- पुष्कलावत (Pushkalavati): सिंधु नदी के पश्चिमी तट पर छोटे पुत्र पुष्कल के नाम पर ‘पुष्कलावत’ नगर की स्थापना की गई (जो वर्तमान समय के पेशावर/चारसद्दा क्षेत्र के पास माना जाता है)।
3. अंगदिया और चंद्रकान्ता (मल्ल देश) — लक्ष्मण जी के पुत्रों द्वारा स्थापना
श्रीराम ने लक्ष्मण जी के दोनों पुत्रों के लिए ऐसे क्षेत्रों का चयन करने का निर्देश दिया जहाँ किसी निर्दोष प्रजा या राजा को कष्ट न पहुँचे। भरत जी के सुझाव पर कारूपथ देश को चुना गया:
- अंगदिया (Angadiya): कारूपथ देश में लक्ष्मण जी के बड़े पुत्र अंगद का राज्याभिषेक करके उनके नाम पर ‘अंगदिया’ नगर बसाया गया।
- चंद्रकान्ता (Chandrakanta): कुश्ती और मल्लविद्या में निपुण छोटे पुत्र चंद्रकेतु के लिए ‘चंद्रकान्ता’ नगर बसाया गया। यह क्षेत्र आगे चलकर मल्ल देश के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
4. कुशावती और श्रावस्ती — लव और कुश के राज्य
श्रीराम ने अपने महाप्रयाण से पूर्व अपने दोनों पुत्रों, लव और कुश के बीच भी राज्य का न्यायपूर्ण विभाजन किया:

श्रावस्ती (Shravasti): उत्तर कोसल क्षेत्र में छोटे पुत्र लव के लिए ‘श्रावस्ती’ (लवपुर/लाहौर से भी जोड़ा जाने वाला क्षेत्र) नगर बसाया गया।
कुशावती (Kushavati): दक्षिण कोसल क्षेत्र में बड़े पुत्र कुश के लिए ‘कुशावती’ नगर बसाकर उन्हें वहाँ का राजा बनाया गया।
