शब्दभेदी बाण और प्रभु श्रीराम: अफवाह बनाम वाल्मीकि रामायण के अकाट्य तथ्य!

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आने वाली बहुचर्चित फिल्म ‘रामायण’ के ट्रेलर के एक दृश्य में भगवान श्रीराम को शब्दभेदी बाण चलाते हुए दिखाया गया है। इस पर कई लोगों ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है। ऐसा कहने वालों में रामानंद सागर के लोकप्रिय धारावाहिक ‘रामायण’ में माता सीता की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री दीपिका चिखलिया भी हैं।

वास्तव में, शब्दभेदी बाण कोई विशेष अस्त्र नहीं, बल्कि इसे चलाने वाले की एक विशेष क्षमता होती थी, जिसमें वह आँखों से बिना देखे केवल ध्वनि के आधार पर लक्ष्य का सटीक अनुमान लगाकर उसका भेदन करता था। यह सच है कि वाल्मीकि रामायण में भगवान श्रीराम द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चलाए गए ‘शब्दभेदी’ नामक किसी अस्त्र का उल्लेख नहीं है। किंतु कम से कम एक ऐसा प्रत्यक्ष विवरण है, जब उन्होंने केवल ध्वनि सुनकर बहुत ही सटीक निशाना लगाया था। यह प्रसंग था ताड़िका-वध का।

प्रसंग इस तरह है कि राम पहले ताड़िका को मारना नहीं चाहते थे, बल्कि केवल इतना घायल करके छोड़ देना चाहते थे कि वह दूसरों को कष्ट न दे पाए। लेकिन घायल होने के बाद वह और भी अधिक क्रोध में भरकर मायावी युद्ध करने लगी। उसने धूल और पत्थरों की ऐसी वर्षा कर दी कि कुछ भी दिखना लगभग असंभव हो गया।

ऐसी स्थिति में राम ने केवल उसके शब्दों को सुनकर, बिना देखे बाण चलाए और इसी बाण से ताड़िका की मृत्यु हुई। इसलिए कहा जा सकता है कि ताड़िका का वध भगवान राम ने शब्दभेदी बाण के द्वारा किया था।पर एक ऐसा भी प्रसंग है, जहाँ उन्होंने ऐसा नहीं किया था और इस कारण संभवतः कुछ लोग मानने लगे कि उन्होंने कभी इस बाण का उपयोग नहीं किया। किंतु यह धारणा वाल्मीकि रामायण के अपूर्ण अध्ययन से बनी है।

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यह प्रसंग है मेघनाद से युद्ध का।मेघनाद ही रावण का वह योद्धा था, जो युद्ध में राम की सेना को कुछ हानि पहुँचा सका था। वह हमेशा मायावी युद्ध करता था। ऐसे ही एक युद्ध में वह अदृश्य होकर आकाश में स्थित होकर अस्त्र-शस्त्र से प्रहार कर रहा था। उसका प्रहार इतना घातक था कि स्वयं राम-लक्ष्मण सहित अधिकांश वानर योद्धा घायल हो गए। किंतु वे प्रत्युत्तर नहीं दे पा रहे थे, क्योंकि मेघनाद किसी को दिखाई नहीं दे रहा था।

यहाँ भगवान राम शब्दभेदी बाण का उपयोग नहीं कर पाए। इसका कारण विस्तार से बताते हुए वाल्मीकि जी कहते हैं कि मेघनाद के रथ के पहियों से भी कोई ध्वनि नहीं हो रही थी। वह आकाश से बिल्कुल निःशब्द प्रहार कर रहा था, वह भी अंधेरे में और स्थान बदल-बदलकर। इससे अस्त्रों के स्रोत या ध्वनि के आधार पर भी उसकी स्थिति का पता लगाना कठिन था।तब राम ने अपने सैनिकों के 10 समूह बनाए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रहने के लिए कहा, ताकि अस्त्रों के सही स्रोत के आधार पर मेघनाद की स्थिति का पता लगाया जा सके।

मेघनाद को राम की इस रणनीति का अनुमान हो गया और वह चुपचाप युद्ध छोड़कर नगर में चला गया।अर्थात, भगवान राम ने मेघनाद पर इसलिए शब्दभेदी बाण नहीं चलाया, क्योंकि वह निःशब्द आक्रमण कर रहा था, न कि इसलिए कि राम को यह विद्या ज्ञात नहीं थी। दूसरी तरफ, ताड़िका धूल और पत्थरों का बवंडर उठाकर चीखते-चिल्लाते हुए आक्रमण कर रही थी और इसलिए शब्दभेदी बाण का निशाना बनी।

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