सीता जी के वेश और आसपास के परिवेश से हनुमान जी को यह तो निश्चय हो गया कि अशोक वाटिका में बंदिनी अवस्था में बैठी स्त्री उनके प्रभु श्रीराम की धर्मपत्नी सीता ही थी। जब तक वे सीता की खोज कर उनके पास पहुंचे तब तक रात समाप्त होने वाली थी। वे सोचने लगे कि अब उन्हे क्या करना चाहिए। उन्होने रुक कर और विस्तार से सीता की स्थिति देखने का निश्चय किया।
रावण का अशोक वाटिका में आना
सुबह हुई। रावण अपने अंतःपुर की स्त्रियों के साथ अशोक वाटिका में आया। रावण को देख कर सीता के मुख पर भय, दुख और चिंता तीनों के भाव एक साथ ही आए। हनुमान रावण की बातें और सीता का भाव देखना चाहते थे। वे वृक्ष में छुपे हुए थे। थोड़ा और नजदीक आ गए।
रावण ने तरह-तरह से सीता को अपनी पत्नी बनने के लिए प्रलोभन दिया। इससे बात नहीं बनी तो भय और झूठे कुतर्कों से समझाया। उसने याद दिलाया कि उसके द्वारा उसे एक वर्ष की जो अवधि दी गई थे, उसमें से दस माह बीत चुके हैं। अब उसके पास केवल दो महीने हैं। (एक वर्ष तक अगर सीता रावण के उसकी पत्नी बनने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करती तब रावण ने धमकी दी थी कि उन्हे मार कर कलेवा (नाश्ता) में परोस देगा।)
लेकिन सीता ने तिनके का ओट कर निर्भयतापूर्वक उसे फटकारा और राम के सामने उसे नगण्य बताया। क्रुद्ध होकर रावण सुरक्षा में लगे राक्षसियों को सीता को नियंत्रण में लाने के लिए हर संभव उपाय करने के लिए कह कर चला गया।
सीता का अपने जीवन को समाप्त करने का विचार
रावण के जाने के बाद राक्षसियाँ सीता को समझाने, डराने और धमकाने लगी। वे उन्हे काट कर खा जाने की धमकी दे रही थीं और कई तरह से डरा रहीं थीं। सीता उनकी बाते मानने से इनकार कर रोने लग गई। रोते-रोते वह इस प्रताड़ना और अपमान से मृत्यु को अच्छा मानते हुए अपने शरीर का अंत करने के लिए सोचने लगी।
लेकिन आत्महत्या करने के लिए उन्हे शस्त्र या विष उन्हे कौन देता? इसलिए उन्होने अपनी चोटी से ही फाँसी लगाने का विचार किया। वह राक्षसियों से कहने लगी कि वे उन्हे काट डालने की धमकी देने के बदले जल्दी काट कर मार ही क्यों नहीं डालती।
तृजटा का स्वप्न और उसका सीता को सांत्वना देना
सीता को इस तरह अनाथ और विक्षिप्त की तरह रोते देख कर हनुमान को बहुत दुख और क्रोध हुआ। तभी तृजटा नामकी एक वृदधा राक्षसी सीता के पास आई। वह अभी तक सो रही थी, इसलिए वहाँ नहीं थी। उसने अपने स्वप्न की बात बता कर सीता को शांत किया।
तृजटा ने स्वप्न में जो देखा था उसका फल यह था कि राक्षसों सहित रावण की मृत्यु होगी और युद्ध जीत कर राम सीता को ले जाएँगे। उसने यह भी देखा था कि एक वानर लंका जला रहा था।
तृजटा के समझाने पर राक्षसियां सीता को तंग करना छोड़ कर दूर हट गई। इतने में सीता को कुछ अच्छे शकुन भी होने लगे। इस सब से उनका का मन कुछ शांत हुआ।
हनुमान द्वारा सीता के समक्ष प्रकट होने का निर्णय
इधर हनुमान विचार करने लगे कि उन्हे तो केवल सीता का पता लगाने के लिए भेजा गया है। सीता को इस अवस्था में देख कर चुपचाप चले जाना चाहिए या सीता से बात करनी चाहिए। बहुत सोच विचार उन्होने देखा अगर वे चुपचाप बिना मिले ही चले जाएँगे तो हो सकता है, जब तक राम सेना के साथ आए तब तक वे जीवित ही न बचे। इसलिए बात कर उन्हे सांत्वना देना चाहिए।
अब दूसरी समस्या थी कि बात कैसे करें। वे अच्छी संस्कृत बोल सकते थे। पर अगर वानर रूप में वे संस्कृत में बोलेंगे तो सीता कहीं उन्हे वेश बदल कर आया हुआ रावण या उसका कोई राक्षस न समझ ले। इसलिए उन्हे अवध के आसपास बोली जाने वाली भाषा में ही बात करनी चाहिए।
फिर यह भी भय था कि वह कुछ ऐसा न कर दे जिससे राक्षसियों का ध्यान उनपर चला जाय। वे सीता को विश्वास और सांत्वना दिए बिना पकड़े नहीं जाना चाहते थे।
हनुमान द्वारा सीता को राम कथा सुनाना
बहुत सोच-समझ कर हनुमान ने इस तरह धीरे-धीरे राम कथा सुनाना शुरू कर दिया जिससे रक्षक राक्षसियाँ न सुन ले। वे उसी वृक्ष की निचली शाखा पर आ गए थे, जिसके नीचे सीता बैठी हुई थी। उन्होने राम के जन्म, वनवास से लेकर सीता हरण और उसके बाद सीता की खोज करते हुए वानरराज सुग्रीव से उनकी मित्रता, वानरों का उन्हें चारों तरफ ढूँढना और एक वानर का ढूँढते-ढूँढते समुद्र पार कर अशोकवाटिका में पहुँचना सभी कुछ सुना दिया।
सीता जब से लंका में आई थी, तब से पहली बार उन्होनें रामनाम सुना था। सुनाने वाले ने उनके अपहरण से पहले और उसके बाद उन्हे ढूँढने के विषय में सुनाया था। इससे वे हर्षित, पर साथ ही सशंकित भी हो उठी थी। उन्हे आशंका इस बात कि थी कि वे ऐसे राक्षसों के बीच थी, जो माया करने, धोखा देने और वेश बदलने में कुशल थे। कहीं उनके साथ कोई छल तो नहीं हो रहा था।
सीता और हनुमान में वार्तालाप
यह सोच कर वे चारो तरफ सावधानी से देखने लगी। उन्हे अपने ऊपर डाली पर बैठे श्वेत रंग के वस्त्र पहने एक छोटा सा वानर दिखाई पड़ा। कुछ देर तक तो उन्हे यही समझ नहीं आया कि वे वास्तव में देख रही हैं या स्वप्न है। फिर वे हनुमान से बाते करने लगीं। बातचीत के बाद हनुमान से राम के शारीरिक चिह्नों, नर-वानर में मित्रता का वृतांत आदि सुनने के बाद उन्हे विश्वास हो गया कि वे वास्तव में राम के भेजे दूत ही थे।
अब हनुमान ने सीता को राम की दी हुई अंगूठी दी। उन्होने अनेक प्रकार से उन्हें सांत्वना दिया। सीता ने हनुमान से राम को शीघ्र बुलाने का आग्रह किया।
उन्हे अधीर देख कर हनुमान ने कहा कि वे उसी समय उनके साथ उनके पीठ पर बैठ कर राम के पास चल सकती थी। तुरंत राम से मिलने की बात से वे खुश तो हुई लेकिन उन्होने इसके लिए मना कर दिया। वे नहीं चाहती थी कि जिस तरह रावण उन्हे चुरा कर ले आया था, उसी तरह राम भी ले जाए।
वे चाहती थी कि राम आए और अपना पराक्रम दिखा कर उन्हे ले जाए। दूसरा, रघुवंश के प्रतापी राजा राम की पत्नी को कोई दूसरा बचा कर ले आए, यह राम के पराक्रम के लिए कलंक की बात होती। तीसरा, वे स्वेच्छा से किसी पर-पुरुष (हनुमान) का स्पर्श नहीं करना चाहती थी। उनके इन बातों से हनुमान को प्रसन्नता हुई।
इसलिए सीता ने हनुमान को राम के लिए संदेश देकर विदा किया। राम को विश्वास हो जाए कि हनुमान वास्तव में सीता से मिले थे, इसलिए उन्होने चित्रकूट प्रवास के दौरान घटी ऐसी घटना सुनाया जिसे सीता और उनके पति राम के अतिरिक्त और कोई नहीं जनता था। एक कौए (जो वास्तव में इन्द्र का पुत्र जयंत था) द्वारा उन पर प्रहार और राम द्वारा उसे दंड देना यह घटना थी। इसके बाद उन्होने अपनी चूड़ामणि भी निशानी के रूप में दिया।
हनुमान द्वारा रावण के पराक्रम आदि के परीक्षण का विचार
इस प्रकार सीता को समझाबुझा कर और सांत्वना देकर हनुमान उस स्थान से उत्तर दिशा की ओर बढ़े। उनके मन में संतोष था कि सीता के पता लगाने का काम तो सम्पन्न हो गया। लेकिन अब राम और रावण में युद्ध होना भी अवश्यंभावी हो गया था। इसलिए शत्रु के पराक्रम और दुर्ग रचना आदि की जानकारी भी ले लेनी चाहिए।
पिछली रात वे पूरी रात नगर में घूमे तो थे, लेकिन एक तो उनका ध्यान सीता को ढूँढने में था, दूसरा रात थी। इसलिए वे सब कुछ ठीक से देख नहीं पाए थे। अब दिन में ठीक से सब को देखना आवश्यक था। लेकिन यह कार्य चुपचाप नहीं हो सकता था। इसलिए उन्होने अब प्रकट होने का विचार किया।

23winvip! Sounds like they’re confident, right? I’m always a little skeptical, but hey, you never know until you try! Could be your lucky number. Take a shot: 23winvip