सीता हरण और राम-रावण युद्ध संभव हो पाया सीता द्वारा सुनहरे रंग के एक बहुत ही सुंदर मृग को देख कर उसे पाने की इच्छा से। इस संबंध में कई तरह के प्रश्न किए जाते हैं। जैसे, सीता मृग को क्यों मरवाना चाहती थी? क्या राम मांसाहारी थे? भगवान होकर भी वे मृग के छल को क्यों नही जान पाए? मृग का स्वरूप अप्राकृतिक था, फिर भी सीता उसके लालच में क्यों आ गई? इत्यादि। लेकिन अगर पूरा प्रसंग पढ़ा जाए तो इन सारे सवालों का जवाब रामायण में ही मिल जाता है। सुनहरे माया मृग का प्रसंग इस प्रकार है।
रावण को सीता हरण के लिए सलाह
अकंपन और शूर्पनखा के द्वारा राम के विरुद्ध उकसाने और सीता के अपहरण के लिए सलाह देने पर रावण इसके लिए मान गया। विभीषण आदि कुछ सभासदों ने उसे मना किया लेकिन उसने नहीं माना। योजना के अनुसार रावण राम से प्रत्यक्ष रूप से उस समय युद्ध नहीं करना चाहता था। उसके अनुसार पत्नी से वियोग में जब राम मानसिक रूप से कमजोर हो जाएँगे तब उनपर आक्रमण कर उन्हें हराना ठीक रहेगा।
राम द्वारा राक्षसवध का वचन
दूसरी तरफ राम दंडाकारण्य के मुनियों को राक्षसों के संहार का वचन दे चुके थे। लेकिन अकारण राक्षसों पर आक्रमण करना अधर्म होता। इसी उद्देश्य से वे पंचवटी आए थे ताकि राक्षसों की तरफ से शत्रुता की पहल हो। अर्थात वे स्वयं बहाना ढूँढ रहे थे।
शूर्पनखा द्वारा सीता पर हमला और उसके भाइयों खर और दूषण द्वारा राम पर आक्रमण और उनके युद्ध में मारे जाने से दंडाकारण्य के राक्षस तो लगभग समाप्त हो चुके थे। लेकिन अन्य राक्षसों का नाश भी आवश्यक था।
सीता हरण की योजना में मारीच का शामिल होना
राम-लक्ष्मण से छुपा कर सीता को लाने के लिए छल करना आवश्यक था। क्योंकि दोनों में से एक-न-एक भाई हमेशा सीता के पास होते ही थे। इसके लिए उसने मारीच से सहायता माँगा। मारीच रूप बदलने में माहिर था। पर, वह राम की शक्ति को जानता था। उनकी पत्नी के अपमान के परिणामों से भी वह परिचित था। इसलिए उसने इस योजना को छोड़ देने के लिए रावण को समझाया। एक बार तो रावण उसकी बात मान गया। लेकिन जब शूर्पनखा के कहने पर उसने दुबारा यह योजना बनाया तो इस बार उसने उसकी बात नहीं माना। विवश होकर मारीच को रावण का साथ देना पड़ा।
माया मृग का पंचवटी आना और राम-लक्ष्मण का संदेह
रावण की योजना के अनुसार मारीच सुनहरे रंगों वाला (सोने का नहीं) एक सुंदर मृग बन गया। वह राम के आश्रम के आसपास घूमने लगा जहाँ सीता उसे देख सके।
जब सीता ने उसे देखा तो वह अपने पति और देवर को शस्त्र लेकर आने के लिए पुकारने लगीं। उन्होंने सच में ऐसा मृग पहले कभी नहीं देखा था। लेकिन उस मृग को देखते ही लक्ष्मण को उसके मारीच होने का संदेह हुआ। कारण यह था कि यह मृग असामान्य था। मारीच द्वारा सुंदर पशुओं का रूप बना कर शिकार के लिए आए राजाओं को छल से मारने के कारनामे उन्होंने सुन रखे थे।
लेकिन सीता ने खुश होकर पति से कहा कि “इस सुंदर मृग को पकड़ कर ले आइए। यह हमलोगों के मनबहलाव के लिए रहेगा।” वे इसे अपने साथ अयोध्या भी ले जाना चाहती थीं। इसी उद्देश्य से कहा यह जीवित नहीं पकड़ा जा सके तो मार कर इसका चर्म भी ला दें क्योंकि वह भी एक अनोखा मृगचर्म होता। स्पष्टतः मृग को मांस भक्षण के लिए नहीं मारना चाहती थी। राम क्षत्रिय थे और क्षत्रिय के लिए शिकार करना मान्य था। मृग चर्म वनवासी तपस्वी भी पहनने और आसन रूप में प्रयोग करते थे।
राम का माया मृग के पीछे जाना
पत्नी और भाई दोनों की बातों को सुनकर राम ने उस मृग को पकड़ने का निश्चय किया। क्योंकि अगर वह दुष्ट मायावी राक्षस होता, तो भी उसे मारना उचित ही होता। पर वे राक्षसों द्वारा प्रतिशोध के प्रति भी सावधान थे। इसलिए लक्ष्मण को सीता के पास छोड़ कर स्वयं उस सुनहरे मृग को पकड़ने के लिए गए।
अपने पीछे राम को आते देख कर मृग बना मारीच दिखते-छुपते, कभी पास-कभी दूर आते-जाते भाग रहा था। राम उसे मारना नहीं बल्कि जिंदा पकड़ना चाहते थे। इसलिए वे भी उसके पीछे आश्रम से बहुत दूर निकल गए।
अब राम ने सोचा यह ऐसे पकड़ में नहीं आ रहा था। इसलिए तीर चलाना चाहिए। दूसरी तरफ मारीच सोच रहा था कि केवल एक भाई उसके पीछे आया। वह दूसरे भाई को भी आश्रम से निकालने की तरकीब सोचने लगा ताकि रावण सीता का अपहरण कर सके।
लक्ष्मण को आश्रम से बाहर निकालने के लिए छल
राम ने बाण छोड़ दिया। बाण लगते ही दर्द से छटपटाता हुआ मारीच अपने वास्तविक रूप में प्रकट हो गया। राम को एक अत्याचारी राक्षस के मारे जाने पर संतोष हुआ। लेकिन अगले ही पल मारीच ने उनकी आवाज में लक्ष्मण और सीता को ज़ोर से पुकारा। यह सुनते ही राम समझ गए कि राक्षस कोई चाल चल रहा था। वे आश्रम की तरफ जल्दी से लौट चले।
इधर मारीच के उस पुकार को सीता और लक्ष्मण ने सुना। सीता ने राम के किसी संकट में होने की आशंका से लक्ष्मण को वहाँ जाने के लिए कहा। लेकिन लक्ष्मण ने बड़े आश्वस्त स्वर में कहा कि यह राक्षसों की कोई चाल हो सकती थी। राम किसी संकट में पड़ ही नहीं सकते थे।

Anyone had some wins on ff555bet? I’m thinking of giving it a try. The layout looks alright, and I’m always on the lookout for new bonuses!
Tried Sprunki Phase 8 Ggtp here today and had a good experience. The page title matches the content, the link is clear, and the game was easy to access on first click.
Found Sprunki Hyper Shifted Phase 2.5 through this page and the mod list is surprisingly good. The layout is clean, it loads fast, and it was easy to jump right into the game.
Was searching for Sprunki Hyper Shifted Phase 2.5 and this page actually delivered. Nice page structure, solid game embed, and no confusing extra steps before playing.
Z8slot777! That number combo sounds lucky already. Maybe I’ll get lucky here. Fingers crossed! Check out Z8slot777 here: z8slot777
538betlogin! Wonder if the login is easy. Hate when you gotta jump through hoops just to play. Hoping for a hassle-free experience! Login into 538bet here: 538betlogin
646jili, huh? Catchy name. Thinking of giving it a shot after work. Any game recommendations? Jili 646 is here: 646jili