कृष्ण का वंश
एक महान योद्धा यदु ने बृज (इसे ब्रज अथवा वृज भी कहते हैं) क्षेत्र में एक राज्य स्थापित किया। यदु के वंशज यदुवंशी या यादव कहे जाते थे। धीरे-धीरे यदुवंश की कई शाखाएँ हो गई। ये सभी शाखाएँ अलग-अलग क्षेत्रों में स्वतंत्र शासन करती थीं। उनमें कोई संगठन और एकता नहीं थी। कभी-कभी आपस में लड़ भी पड़ते थे। ऐसे ही समय में शूरसेन का जन्म हुआ था।
कृष्ण के दादा कौन थे?
कृष्ण के दादा का नाम था शूरसेन। उनका जन्म भी यादव वंश की एक शाखा में ही हुआ था। शूरसेन बहुत ही पराक्रमी और दूरदर्शी थी। उन्होने बिखरे हुआ यदुवंशियों को संगठित किया और एक बड़ा राज्य फिर से स्थापित किया। लेकिन इसके लिए उन्होने अन्य यदुवंशियों की जानें नहीं ली बल्कि उन्हें संगठित किया। उन्होने समस्त यादव साम्राज्य को कई मंडलों में बाँट दिया। मण्डल प्रशासनिक इकाई थे। इनके अंतर्गत यादव वंश की शाखाएँ पहले की तरह ही अपने-अपने क्षेत्र में शासन करती रही। इन राजवंशों में जो सबसे अधिक शक्तिशाली होता था उसे सभी अपना अधिपति मान लेते थे। अधिपति को समय-समय पर वे कुछ कर देते रहते थे। इसके अलावा अन्य मामलों में वे लगभग स्वतंत्र थे।
शूरसेन ने अपने राज्य को मथुरा और शूरसेन- नामक दो मंडलों में विभक्त किया। उन्होने ही सबसे पहले मथुरा को अपनी राजधानी बनाया जो उनके बाद भी यादव साम्राज्य की राजधानी बनी रही।
शूरसेन के बाद यदुवंश
शूरसेन के बाद यादवों की वृषणी या भोज वंश ने अधिक शक्ति प्राप्त कर लिया। यह भोज वंश मध्यकालीन भोजवंश से अलग था। अब सभी यादव उन्हें ही अपना अधिपति मानने लगे। उनकी राजधानी मथुरा थी। शूरसेन और मथुरा मण्डल अभी भी भोज या वृषणी यादव साम्राज्य के अंतर्गत स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई थी। उनके शासक भोज वंशी शासक को केवल सैद्धान्तिक रूप से अपना अधिपति मानते थे और कुछ कर देते थे। शूरसेन के पुत्र हुए वसुदेव। कृष्ण-बलराम इनके ही पुत्र हुए। इस तरह शूरसेन कृष्ण-बलराम के दादा थे।
यद्यपि अब वृषणी या भोज यादवों का वंश सबसे शक्तिशाली वंश हो गया था और सभी यादव उसे ही अपना सैद्धान्तिक अधिपति मानते थे और कर देते थे। लेकिन सदाचार, धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा के कारण शूरसेन वंश का यादवों में विशेष सम्मान था।
कृष्ण के नाना कौन थे?
सभी यादवों के अधिपति थे वृषणी या भोज वंश के यदुवंशी राजा। इनकी राजधानी मथुरा थी। यादवों में उस समय सबसे अधिक शक्तिशाली यही वंश था। इनके एक राजा थे आहुक। आहुक के दो पुत्र हुए- उग्रसेन और देवक। उग्रसेन का पुत्र था कंस और देवक की पुत्री थी देवकी। आहुक के बाद उनके पड़े पुत्र उग्रसेन राजा बने। वह एक लोकप्रिय राजा थे। प्रजा और परिवार का वे सदा कल्याण चाहते थे। लेकिन उन्हें बलपूर्वक गद्दी से हटा कर उनका पुत्र कंस राजा बन बैठा।
वृषणी या भोज वंश के आहुक के छोटे पुत्र देवक की पुत्री देवकी का विवाह शूरसेन वंश के वसुदेव से साथ हुआ था। देवकी-वसुदेव ही कृष्ण-बलराम के माता-पिता बने।
इस तरह वृषणी या भोज वंश के यादव राजा आहुक कृष्ण के परनाना और कंस के दादा थे। कंस के चाचा देवक कृष्ण के नाना थे।
